سورة الشورى
عن هذه الطبعة
- عَلَم
- ابن كثير
- الكتاب
- تفسير القرآن العظيم (ابن كثير)
- المؤلف
- أبو الفداء إسماعيل بن عمر بن كثير القرشي البصري ثم الدمشقي (المتوفى: 774هـ)
- المحقق
- محمد حسين شمس الدين
- الناشر
- دار الكتب العلمية، منشورات محمد علي بيضون - بيروت
- الطبعة
- الأولى - 1419 هـ [ترقيم الكتاب موافق للمطبوع، وهو ضمن خدمة مقارنة التفاسير]
[1- 3] : (1) 71. [5] : (1) 243. [7] : (4) 301.
[10] : (2) 304، (6) 108. [13] : (3) 328، 339، (5) 81، (6) 342. [15] : (5) 395، (8) 479. [16] : (4) 208. [18] : (3) 468، (4) 238، 371، 476، (5) 79، (7) 263، (8) 238. [20] : (2) 113، 382، (4) 269. [21] : (3) 263. [23] : (5) 422. [24] : (1) 86. [28] : (3) 386، (6) 105، (8) 57. [30] : (2) 320. [36] : (2) 157. [40] : (1) 94، 390، 389، (4) 511، 528. [41] : (2) 392. [44] : (5) 429. [45] : (4) 230. [47] : (8) 4. [52] : (1) 51، 74، 214، 364، (4) 477، (8) 177، 313. [53] : (6) 70.
سورة الزخرف
[4] : (4) 460. [8] : (1) 427. [12- 14] : (4) 279، 478، (5) 412. [13، 14] : (8) 227. [15] : (3) 309. [19] : (2) 366، (7) 426. [20] : (3) 321. [22] : (1) 68. [23] : (3) 297، (4) 258، 267، 274، (5) 427. [26، 27] : (1) 318. [26- 28] : (3) 479. [28] : (1) 318. [31] : (2) 24، (5) 167. [31، 32] : (3) 298، (5) 422، (7) 47. [32] : (2) 24، (3) 346. [33، 35] : (1) 301. [36] : (3) 304، (5) 232. [36، 37] : (3) 464، (7) 159. [38] : (2) 26. [44] : (5) 293، (8) 141. [45] : (1) 40، (2) 57، (3) 407، (4) 231، 489، (5) 296. [51] : (5) 141. [52] : (4) 452، (5) 249. [53] : (6) 87. [54] : (3) 412، (6) 125، 213. [59] : (2) 5، 425، (3) 143، (5) 334. [60] : (1) 124، (3) 345. [61] : (2) 413، (5) 334. [63] : (2) 38. [67] : (6) 245. [71] : (1) 109، (4) 488. [72] : (5) 234. [76] : (5) 413. [77] : (5) 268، (6) 489. [81] : (3) 268، (5) 296، (6) 362، (7) 75.
[84] : (1) 37، (3) 215. [87] : (4) 217، 267. [89] : (4) 468.
سورة الدخان
[3] : (1) 368، (8) 425. [4] : (8) 427. [25] : (4) 256. [25- 28] : (3) 419. [32] : (1) 158. [35] : (5) 228. [43- 50] : (4) 417. [47- 50] : (5) 351. [48، 49] : (4) 124. [56] : (2) 221، 235.
سورة الجاثية
[10] : (5) 431. [13] : (2) 426، (5) 394. [15] : (1) 542، (6) 238. [16] : (3) 66. [21] : (6) 329، (8) 107. [23] : (1) 86، (6) 65. [26] : (1) 120، (5) 394. [28] : (3) 255، (6) 520. [28، 29] : (5) 90. [29] : (8) 205. [34] : (3) 381، (4) 52، (6) 323.
سورة الأحقاف
[5] : (5) 231. [5، 6] : (4) 231، 421، 509، (5) 153، (6) 91. [6] : (4) 272. [8] : (5) 395. [9] : (4) 493، (5) 292. [11] : (3) 233، 387، (5) 227. [12] : (3) 331. [15] : (1) 478. [16] : (2) 373. [19] : (2) 138. [21] : (7) 154. [25] : (5) 413، (6) 139. [25، 26] : (3) 405. [26] : (3) 463، (7) 125. [27] : (1) 188، 189، (4) 397، (5) 302. [28] : (1) 160. [29- 32] : (3) 305. [33] : (4) 371، 418، (5) 113، (7) 370، 382. [46، 47] : (1) 346.
سورة محمد
[4] : (2) 325، (4) 22، 100. [4- 6] : (2) 99، (4) 18، (5) 381. [7] : (2) 152، (8) 139. [10] : (2) 194، (4) 490، (6) 100. [13] : (2) 315. [15] : (4) 400، (5) 140، (8) 18. [17] : (1) 89، (5) 17، 127. [18] : (3) 338. [20] : (2) 315، (8) 133. [20، 21] : (4) 173. [22] : (1) 119. [24] : (1) 8، (2) 322. [25] : (2) 248.
[29، 30] : (4) 150. [30] : (1) 91، 543. [31] : (1) 38، (5) 381، (6) 240. [38] : (2) 382، (3) 123، (4) 136، 419، (8) 244.
سورة الفتح
[2] : (7) 254. [5] : (7) 254. [6] : (1) 16. [12] : (2) 128. [15] : (4) 169. [16] : (1) 522. [24] : (1) 388. [25] : (1) 388، (4) 44، 101، (5) (372) . [27] : (8) 437. [29] : (4) 209. [40] : (5) 127.
سورة الحجرات
[4] : (1) 134. [4، 5] : (6) 82. [7] : (3) 300. [9] : (4) 99. [12] : (5) 69، (7) 355. [13] : (3) 474 (6) 75. [14] : (6) 372.
سورة ق
[6] : (5) 298. [7] : (5) 435. [14] : (6) 226. [16] : (4) 30. [17] : (5) 48. [17، 18] : (3) 238، (5) 47. [29] : (1) 65. [33] : (1) 76. [38] : (7) 153. [39] : (3) 487. [45] : (1) 280. [39، 40] : (1) 371.
سورة الذاريات
[8، 9] : (3) 288، (7) 369. [9] : (1) 143. [17، 18] : (6) 111. [23] : (4) 193. [26، 27] : (4) 287. [29] : (4) 288. [35، 36] : (3) 400. [38] : (5) 351. [47] : (5) 298، (7) 154. [47، 48] : (6) 438. [49] : (7) 370. [52] : (1) 279، (4) 258. [52، 53] : (7) 125. [56] : (3) 218، (4) 266. [56- 58] : (5) 288. [58] : (5) 397.
سورة الطور
[9، 10] : (5) 148. [11] : (4) 444. [13] : (7) 106. [13- 15] : (6) 520. [13- 16] : (4) 238، (6) 262.
[14] : (4) 488. [14- 16] : (3) 375، (4) 490. [15] : (3) 223. [16] : (5) 47، 246. [19] : (7) 13. [21] : (4) 388، (5) 55، (7) 119. [23] : (8) 312. [30] : (6) 334. [35، 36] : (1) 120، (6) 244. [44] : (3) 216، (4) 225.
سورة النجم
[4] : (1) 297. [5- 10] : (8) 337. [9] : (1) 200، 415. [13- 16] : (8) 337. [16] : (1) 570، (5) 27. [17] : (5) 41. [18] : (5) 3. [19] : (2) 366. [21] : (3) 309. [21، 22] : (4) 495. [22] : (3) 309. [23] : (3) 263، (4) 399، (8) 479. [26] : (1) 519، (4) 216، 383، (5) 279. [30] : (4) 452. [31] : (4) 468، 477، 490، (5) 294، (6) 66، (7) 124. [32] : (2) 293، (4) 373، (6) 526. [36] : (8) 375. [36- 42] : (8) 375. [37] : (1) 283، 285، (2) 374، (4) 525، (7) 27، (8) 375. [50] : (6) 139. [53] : (4) 153. [54] : (4) 293. [54، 55] : (5) 270.
سورة القمر
[1] : (4) 476، (6) 426. [1، 2] : (5) 290. [8] : (3) 254، (4) 442، (7) 384، (8) 274. [10] : (4) 276، (5) 412. [11- 14] : (4) 278. [12] : (5) 322. [13- 15] : (4) 280. [25، 26] : (7) 48. [26] : (5) 289، (8) 208. [28] : (3) 395. [29] : (6) 179، (8) 401. [34] : (5) 88. [37] : (4) 292. [40] : (6) 258. [44- 46] : (7) 48. [45] : (4) 20. [48، 49] : (6) 261. [50] : (1) 278، (4) 506، (5) 79، (6) 85، (7) 123، 385. [52] : (4) 493، (6) 147. [55] : (6) 312. [69] : (7) 154.
سورة الرحمن
[6] : (1) 199.
[7] : (8) 59. [14] : (1) 137. [14، 15] : (4) 457، 458. [17] : (7) 4. [19، 20] : (3) 305. [19- 21] : (6) 107. [22] : (3) 305، (5) 157، (7) 280. [22، 23] : (6) 478. [26] : (2) 156، 316. [26، 27] : (5) 299. [27] : (2) 431. [29] : (4) 232. [43، 44] : (4) 217، 417. [44] : (5) 141، (7) 18. [46] : (3) 483، (4) 416. [46، 47] : (7) 280. [54] : (2) 102 (8) 297. [57] : (7) 279. [60] : (3) 331، (4) 229، (5) 331. [70] : (7) 11. [74] : (7) 280.
فصول الكتاب · 2193 فصل · 584 صفحة
عن هذه الطبعة
- عَلَم
- ابن كثير
- الكتاب
- تفسير القرآن العظيم (ابن كثير)
- المؤلف
- أبو الفداء إسماعيل بن عمر بن كثير القرشي البصري ثم الدمشقي (المتوفى: 774هـ)
- المحقق
- محمد حسين شمس الدين
- الناشر
- دار الكتب العلمية، منشورات محمد علي بيضون - بيروت
- الطبعة
- الأولى - 1419 هـ [ترقيم الكتاب موافق للمطبوع، وهو ضمن خدمة مقارنة التفاسير]